हाईकोर्ट का विश्लेषण और मुख्य निर्णय
- तलाक-ए-हसन की वैधता: हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक शायरा बानो मामले का संदर्भ दिया। कोर्ट ने समझाया कि तलाक-ए-हसन में 3 अलग-अलग महीनों/चक्रों में तलाक बोला जाता है। पहले दो उच्चारणों के दौरान समझौता या सुलह संभव है, लेकिन तीसरे उच्चारण के बाद तलाक अपरिवर्तनीय (Irrevocable) हो जाता है।
- हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणी:“यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता द्वारा दिया गया ‘तलाक-ए-हसन’ तलाक का एक वैध रूप है और वर्तमान में देश में प्रतिबंधित नहीं है, यह अदालत याचिकाकर्ता को 2024 के नए अधिनियम के तहत संबंधित विवाह और तलाक रजिस्ट्रार के पास तलाक के पंजीकरण के लिए आवेदन करने का निर्देश देती है।” — न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी
अदालत का अंतिम निर्देश
- पुराने प्राधिकारी को निर्देश से इनकार: कोर्ट ने बरपेटा के पुराने अधिकारी को तलाकनामा पंजीकृत करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया क्योंकि 1935 का कानून अब अस्तित्व में नहीं है।
- 2024 के नए कानून के तहत आवेदन: याचिकाकर्ता को नए 2024 अधिनियम की धारा 12 के तहत क्षेत्रीय विवाह और तलाक रजिस्ट्रार के समक्ष आवेदन करने का निर्देश दिया गया।
- सत्यापन और अपील का अधिकार: रजिस्ट्रार यह जांच करेगा कि क्या तलाक-ए-हसन वैध तरीके से हुआ है और पहचान की पुष्टि करेगा। यदि रजिस्ट्रार पंजीकरण से इनकार करता है, तो याचिकाकर्ता धारा 17 के तहत अपील कर सकता है।
गुवाहाटी: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और वैवाहिक विच्छेद पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि ‘तलाक-ए-हसन’ (Talaq-E-Hassan) वर्तमान में भारत में प्रतिबंधित नहीं है और यह तलाक का एक वैध रूप है।
न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की एकल पीठ ने 8 सितंबर 2026 को तलाक-ए-हसन के पंजीकरण की मांग करने वाली एक रिट याचिका का निस्तारण करते हुए यह व्यवस्था दी। अदालत ने फैसला सुनाया कि ‘असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024’ के लागू होने और पुराने 1935 के कानून के निरस्त होने के बाद, तलाक-ए-हसन के माध्यम से दिए गए तलाक के पंजीकरण के लिए सक्षम क्षेत्राधिकार वाले ‘मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रार’ (Marriage & Divorce Registrar) के पास आवेदन करना होगा [एक्स बनाम असम राज्य एवं अन्य]।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. ‘तलाक-ए-हसन’ की विधिक वैधता (शायरा बानो फैसले का संदर्भ) सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक शायरा बानो बनाम भारत संघ (2017) फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा: “तलाक-ए-हसन में तीन अलग-अलग अवधियों (तुहर/महीनों) में तीन क्रमिक घोषणाएं शामिल होती हैं। पहली दो घोषणाओं को वापस लिया (Revoke) जा सकता है, जबकि तीसरी घोषणा सभी आवश्यक शर्तें पूरी होने पर तलाक को अपरिवर्तनीय (Irrevocable) बनाती है। यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता द्वारा घोषित तलाक-ए-हसन तलाक का एक वैध रूप है और देश में आज की तारीख में प्रतिबंधित नहीं है, यह अदालत याचिकाकर्ता को 2024 के उक्त अधिनियम के तहत क्षेत्राधिकार वाले मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण के लिए जाने का निर्देश देती है।”
(उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केवल ‘तलाक-ए-बिद्दत’ यानी इंस्टेंट ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक और संसद द्वारा दंडनीय घोषित किया गया है, जबकि तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन को असंवैधानिक घोषित नहीं किया गया है।)
2. पुराने 1935 के कानून के निरस्तीकरण का प्रभाव
- असम सरकार द्वारा 1935 के ‘असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम’ को निरस्त कर दिया गया है और उसके तहत नियुक्त मुस्लिम मैरिज रजिस्ट्रारों (काजियों) के पदों को समाप्त कर दिया गया है।
- इसलिए अदालत ने पुराने बारपेटा प्राधिकारी को तलाकनामा पंजीकृत करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया और नए वैधानिक तंत्र का पालन करने को कहा।
मामले की पृष्ठभूमि
- विवाह और विवाद: याचिकाकर्ता का निकाह वर्ष 2016 में प्रतिवादी संख्या 5 के साथ हुआ था। बाद में आपसी मतभेद होने पर पत्नी 2018 में ससुराल छोड़कर चली गई। समझौते के प्रयास विफल रहे।
- तलाक-ए-हसन की क्रमिक घोषणाएं: याचिकाकर्ता ने विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए तीन अलग-अलग तारीखों—22 मार्च, 26 अप्रैल और 27 मई 2026—को तलाक-ए-हसन का उच्चारण किया।
- पंजीकरण के लिए याचिका: इसके बाद जब वह तलाक के पंजीकरण के लिए प्राधिकारियों के पास गया, तो पुराने कानून के निरस्तीकरण के कारण उसका तलाक पंजीकृत नहीं किया गया, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट का अंतिम निर्देश (2024 अधिनियम की प्रक्रिया)
- नए रजिस्ट्रार के समक्ष आवेदन: याचिकाकर्ता ‘असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024’ के तहत सक्षम रजिस्ट्रार के पास जाएगा।
- सत्यापन प्रक्रिया (धारा 12): रजिस्ट्रार धारा 12 के तहत यह परीक्षण करेगा कि क्या याचिकाकर्ता द्वारा तलाक का विधिवत उच्चारण किया गया है और उसकी पहचान सत्यापित कर पंजीकरण पर निर्णय लेगा।
- अपील का अधिकार (धारा 17): यदि रजिस्ट्रार पंजीकरण से इनकार करता है, तो याचिकाकर्ता 2024 अधिनियम की धारा 17 के तहत अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर कर सकता है।
विधिक विवरण
- केस शीर्षक: एक्स बनाम असम राज्य एवं 4 अन्य (Writ Petition)
- प्रासंगिक कानून: असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024 (धारा 12 एवं 17)
- पीठ: न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी (आदेश की तारीख: 8 सितंबर 2026)
Talaq-E-Hassan: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | गुवाहाटी उच्च न्यायालय (Gauhati High Court) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी |
| मुख्य पक्षकार | X बनाम असम राज्य एवं 4 अन्य |
| विवादित विषय | तलाक-ए-हसन के माध्यम से दिए गए तलाक का पंजीकरण |
| कोर्ट का आदेश | तलाक-ए-हसन वैध है; याचिकाकर्ता 2024 के नए कानून के तहत रजिस्ट्रार के पास जाकर तलाक रजिस्टर कराए। |

