Tuesday, October 27, 2026
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Policy Demand: निजी स्कूल के शिक्षकों के लिए बने कल्याणकारी नीति; पेंशन-बीमा व सामाजिक सुरक्षा का अधिकार; नेशनल वेलफेयर बोर्ड बनाएं

याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु और आंकड़े

  1. शिक्षकों की विशाल संख्या (UDISE+ Data): याचिका में UDISE+ 2023-24 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि भारत भर के मान्यता प्राप्त निजी गैर-सहायता प्राप्त (Private Unaided) स्कूलों में 37,30,047 से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, जो देश के शिक्षणबल का एक बड़ा हिस्सा हैं।
  2. सुरक्षा का अभाव और अनुबंध प्रथा: अधिकांश निजी शिक्षक संविदा (Contractual), अस्थायी (Ad-hoc), या सालाना नवीनीकृत होने वाले पदों पर काम करते हैं। वे बिना किसी सुरक्षित पेंशन, पर्याप्त चिकित्सा बीमा या सेवानिवृत्ति लाभ के ही रिटायर हो जाते हैं।
  3. विद्यमान कानूनों की सीमित सीमा: कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम (ESI Act), कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम (EPF Act), और ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम जैसे मौजूदा कानून निजी शिक्षकों को केवल आंशिक और अलग-अलग राज्यों के हिसाब से खंडित (Fragmented) सुरक्षा ही देते हैं।
  4. समान कार्य, असमान सुरक्षा: याचिका में तर्क दिया गया कि एक ही प्रकार का कार्य करने के बावजूद राज्यों और विभिन्न संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के बीच सुरक्षा को लेकर भारी असमानता है, जो उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों (Private Unaided Schools) में कार्यरत 37 लाख से अधिक शिक्षकों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय कल्याणकारी नीति (National Welfare Policy) और सामाजिक सुरक्षा ढांचा तैयार करने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार तथा सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है [लिजीमोल जॉर्ज बनाम भारत संघ एवं अन्य]।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने ‘ऑल इंडिया टीचर्स फेडरेशन’ की राष्ट्रीय समन्वयक लिजीमोल जॉर्ज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में निजी शिक्षकों के लिए एक समर्पित ‘राष्ट्रीय निजी स्कूल शिक्षक कल्याण बोर्ड’ (National Private School Teachers Welfare Board) गठित करने की मांग की गई है।

याचिका में उठाए गए मुख्य विधिक व संवैधानिक मुद्दे

1. 37 लाख से अधिक शिक्षकों की सामाजिक असुरक्षा (UDISE+ 2023-24 डेटा) याचिका में केंद्र सरकार के आधिकारिक यूडीआईएसई+ (UDISE+) 2023-24 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि:

  • देश भर के मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में कुल 37,30,047 (37.30 लाख) शिक्षक कार्यरत हैं, जो देश के कुल शिक्षण कार्यबल का एक विशाल हिस्सा हैं।
  • इसके बावजूद उनके कल्याण, सेवा सुरक्षा और सेवानिवृत्ति के बाद की सुरक्षा के लिए कोई एकीकृत राष्ट्रीय वैधानिक तंत्र (Dedicated National Statutory Mechanism) मौजूद नहीं है।

2. मौजूदा कानूनों का खंडित और सीमित दायरा याचिकाकर्ता ने दलील दी कि मौजूदा श्रम व सामाजिक सुरक्षा कानून निजी स्कूल शिक्षकों को व्यापक सुरक्षा देने में असमर्थ रहे हैं:

  • कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम (ESI Act), कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम (EPF Act), ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम (Payment of Gratuity Act) और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020) के तहत मिलने वाले लाभ विभिन्न राज्यों और पात्रता शर्तों के कारण बेहद सीमित, असंगत और खंडित (Fragmented) हैं।

3. अनुबंध, तदर्थ और अनिश्चित नियुक्तियां (अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन)

  • निजी स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षक संविदा (Contractual), अस्थायी (Temporary), तदर्थ (Ad-hoc), फिक्स्ड-पे या वार्षिक नवीकरणीय शर्तों पर काम करने को मजबूर हैं।
  • उन्हें बिना किसी सुनिश्चित पेंशन, पर्याप्त चिकित्सा सहायता, स्वास्थ्य बीमा, विकलांगता संरक्षण या सम्मानजनक सेवानिवृत्ति लाभों के सेवामुक्त कर दिया जाता है।
  • समान कार्य करने के बावजूद राज्यों और विभिन्न निजी संस्थानों में शिक्षकों के साथ हो रहा यह भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन और आजीविका का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।

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याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें

  1. राष्ट्रीय कल्याण नीति का निर्माण: केंद्र सरकार को निजी स्कूल शिक्षकों के लिए अनिवार्य पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, ग्रेच्युटी और विकलांगता लाभों से युक्त एक समान राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया जाए।
  2. राष्ट्रीय शिक्षक कल्याण बोर्ड का गठन: राज्यों के बीच कल्याणकारी उपायों के समन्वय, निगरानी और क्रियान्वयन के लिए ‘National Private School Teachers Welfare Board’ जैसी संस्थागत व्यवस्था स्थापित की जाए।
  3. सेवा शर्तों का मानकीकरण: निजी स्कूल शिक्षकों के शोषण को रोकने और उनके वेतन व सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए कड़े दिशानिर्देश तय किए जाएं।

विधिक प्रतिनिधित्व

  • याचिकाकर्ता (लिजीमोल जॉर्ज) की ओर से: अधिवक्ता दीपक प्रकाश
  • पीठ: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता

Policy Demand: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतभारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)
पीठासीन पीठजस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता
याचिकाकर्तालिगीमोल जॉर्ज (National Coordinator, All India Teachers Federation)
मामले का नामलिगीमोल जॉर्ज बनाम भारत संघ एवं अन्य (Ligimol George v. UOI & Ors.)
मुख्य मांगनिजी शिक्षकों के लिए ‘राष्ट्रीय कल्याण बोर्ड’ और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा नीति की स्थापना
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