Sunday, November 1, 2026
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Direct Salary Deduction: भरण-पोषण के लिए पति के वेतन से सीधे कटेगी राशि…लापरवाही बरतने वाले जजों को क्यों दी अवमानना की चेतावनी

केस मैट्रिक्स: Allahabad HC Directives on Direct Salary Deduction for Maintenance

प्रक्रियात्मक और विधिक पहलूविवरण / अदालत का फैसला
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस प्रवीण कुमार गिरि (Justice Praveen Kumar Giri)
संबंधित क्षेत्रउत्तर प्रदेश की सभी फैमिली कोर्ट्स और ग्राम न्यायालय
मुख्य कानूनी निर्देश1. वेतन से सीधे भरण-पोषण काटकर पत्नी के खाते में ट्रांसफर होगा।
2. हर महीने नई अर्जी लगाने की जरूरत नहीं होगी।
3. भुगतान न करने पर संपत्ति कुर्की और जेल।
न्यायाधीशों के लिए चेतावनीआदेश का अनुपालन न कराने वाले जजों पर अनुशासनात्मक और अवमानना की कार्रवाई होगी।

Direct Salary Deduction: पतियों द्वारा पत्नियों को भरण-पोषण (Maintenance) की राशि न देने और पारिवारिक अदालतों के आदेशों के बावजूद बार-बार चक्कर कटवाने के मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने आदेश का पालन न करने वाले पीठासीन अधिकारियों (न्यायाधीशों) को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इन दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन नहीं किया गया, तो संबंधित जजों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) और अवमानना की कार्यवाही (Contempt Proceedings) शुरू की जाएगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सभी फैमिली कोर्ट और ग्राम न्यायालयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि पति के वेतन से भरण-पोषण की राशि सीधे काटकर पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाए।

मामला क्या था?: जौनपुर फैमिली कोर्ट का विवाद

  • घटनाक्रम: जौनपुर जिले की एक महिला ने 2018 में भरण-पोषण के लिए आवेदन किया था। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश (फैमिली कोर्ट-I, जौनपुर) ने 4 मार्च 2023 को पति को हर महीने ₹5,000 भरण-पोषण देने का आदेश दिया था।
  • समस्या: आदेश के बावजूद पति द्वारा लगातार पैसे नहीं दिए जा रहे थे। पत्नी को हर महीने बकाया राशि पाने के लिए फैमिली कोर्ट में बार-बार पुनरीक्षण याचिकाएं (Revision Applications) लगानी पड़ रही थीं।
  • हाई कोर्ट में याचिका: जब जौनपुर की फैमिली कोर्ट से राहत नहीं मिली, तो पीड़ित महिला ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अप्रैल 2025 से आगे का बकाया भरण-पोषण दिलाने की गुहार लगाई।
  • पति का रुख: हाई कोर्ट द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी करने और बार-बार याद दिलाने के बावजूद पति की ओर से कोई कोर्ट में पेश नहीं हुआ।

हाई कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश की सभी अदालतों के लिए जारी दिशानिर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूरी व्यवस्था को सुचारू बनाने और महिलाओं को अदालतों के चक्कर लगाने से बचाने के लिए राज्य की सभी फैमिली कोर्ट्स और ग्राम न्यायालयों को निम्नलिखित बाध्यकारी निर्देश दिए हैं:

हर महीने नई निष्पादन याचिका (Execution Application) की जरूरत नहीं

कोर्ट ने साफ किया कि पत्नियों को हर महीने का भरण-पोषण पाने के लिए बार-बार नई याचिकाएं या आवेदन दाखिल करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

कंपनी/विभाग सीधे वेतन से काटेगा पैसे

यदि पति/विपक्षी किसी सरकारी या निजी नौकरी (वेतनभोगी) में है, तो ट्रायल कोर्ट सीधे उसके विभाग, नियोक्ता या कंपनी (Employer) को आदेश जारी करेगा कि वह पति के वेतन/मानदेय से भरण-पोषण की राशि काटकर सीधे पत्नी के सत्यापित बैंक खाते में जमा करे।

संपत्ति कुर्की और जेल का प्रावधान

यदि बैंक खाते में पर्याप्त राशि न होने या पति द्वारा भुगतान से इनकार करने की स्थिति बनती है, तो अदालत तुरंत कानूनी प्रक्रिया के तहत पति की संपत्ति कुर्क (Attachment of Property) करके राशि वसूल करेगी। यदि संपत्ति भी बकाया चुकाने के लिए अपर्याप्त है, तो प्रत्येक महीने की चूक के लिए 1 महीने तक की साधारण कैद (Simple Imprisonment) का आदेश दिया जाएगा।

जजों की जिम्मेदारी तय

जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की मुख्य टिप्पणी: “यदि इन निर्देशों का उत्तर प्रदेश राज्य के फैमिली कोर्ट्स और ग्राम न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों द्वारा अक्षरशः पालन नहीं किया जाता है, तो वे कानून के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ अवमानना कार्यवाही के भागी होंगे।”

हाई कोर्ट का अंतिम आदेश

  1. तत्काल बकाया भुगतान: कोर्ट ने जौनपुर के पति को आज तक का पूरा बकाया भरण-पोषण तुरंत क्लियर करने और 4 मार्च 2023 के आदेश के तहत लगातार मासिक भुगतान जारी रखने का निर्देश दिया।
  2. प्रशासन और पुलिस का सहयोग: जिला प्रशासन और पुलिस को ऐसे आदेशों के अमल में पूरी मदद करने का निर्देश दिया गया है।
  3. न्यायिक प्रशिक्षण: रजिस्ट्रार (अनुपालन) को इस आदेश की एक प्रति न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (JTRI), लखनऊ को भेजने का निर्देश दिया गया ताकि नए और मौजूदा न्यायिक अधिकारियों को इसका शैक्षणिक प्रशिक्षण दिया जा सके।

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