केस एवं विधिक सारांश (Overview Matrix)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (August 2026) |
| माननीय पीठ | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन एवं न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. (केरल हाई कोर्ट) |
| केस नाम | साबू स्टीफन बनाम केंद्र सरकार व अन्य (Sabu Stephen v. Union of India & Ors.) |
| मुख्य सिफारिशें | 1. राज्य पेंशन बढ़ाकर न्यूनतम ₹50,000 प्रति माह करने पर विचार। 2. पब्लिक कंट्रीब्यूशन हेतु Special Welfare Fund की स्थापना। 3. स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एकीकृत डेटा/पोर्टल का निर्माण। |
| अदालत का अंतिम आदेश | केंद्र और राज्य सरकार को नीतिगत निर्णय लेने का निर्देश देकर PIL निष्पादित (Disposed of)। |
Freedom Fighter Welfare: केरल हाईकोर्ट ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपने जीवन और युवाओं का योगदान देने वाले जीवित स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान और सहायता व्यक्त करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने ‘साबू स्टीफन’ द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए 11 अगस्त 2026 को यह आदेश पारित किया। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे जीवित स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक विशेष कल्याण कोष (Special Welfare Fund) बनाने और राज्य योजना के तहत उनकी मासिक पेंशन को बढ़ाकर ₹50,000 करने पर विचार करें।
अदालत ने आदेश सुनाते हुए टिप्पणी की: केरल स्वतंत्रता सेनानी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम ₹50,000 प्रति माह की मासिक पेंशन के अनुरोध पर राज्य प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और बलिदान को ध्यान में रखते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।
🏛️ हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश और सुझाव
- विशेष कल्याण कोष (Special Welfare Fund)
- हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि वे जीवित स्वतंत्रता सेनानियों की मदद के लिए एक विशेष वेलफेयर फंड बनाने पर विचार करें, जिसमें आम जनता भी अपना योगदान (Public Contribution) दे सके।
- ऑनलाइन पोर्टल और डेटाबेस निर्माण
- अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक ऐसा डिजिटल पोर्टल तैयार करे जिसमें केरल के सभी जीवित स्वतंत्रता सेनानियों का अद्यतन (Updated) डेटा दर्ज हो, ताकि वे आसानी से उपलब्ध विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।
- 80वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2026) के संदर्भ में पहल
- याचिकाकर्ता ने 15 अगस्त को मनाए जाने वाले देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इन वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित करने और उनके योगदान को याद करने की अपील की थी।
याचिकाकर्ता की दलीलें और जमीनी स्थिति
- केरल में जीवित स्वतंत्रता सेनानियों की संख्या
- सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता साबू स्टीफन ने कोर्ट को अवगत कराया कि वर्तमान में केरल में केवल लगभग 60 स्वतंत्रता सेनानी ही जीवित बचे हैं।
- इनमें से 27 स्वतंत्रता सेनानियों को केंद्र सरकार की ‘स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना’ के तहत और 33 स्वतंत्रता सेनानियों को केरल राज्य सरकार की पेंशन योजना के तहत वित्तीय सहायता मिल रही है।
- 90 से अधिक उम्र और गिरता स्वास्थ्य
- याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ये सभी जीवित सेनानी 90 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं और उनकी शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में उपस्थित हो सकें।
- “हमने पिछले कई दशकों में उनके अमूल्य योगदान की उपेक्षा की है। अगले साल तक इनमें से कितने जीवित रहेंगे, कोई नहीं जानता,” याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने भावुक अपील रखी।
- अदालत का अवलोकन
- यद्यपि पीठ ने शुरुआत में टिप्पणी की कि याचिका की कुछ प्रार्थनाएं अस्पष्ट थीं और कोई भी स्वतंत्रता सेनानी स्वयं कोर्ट के समक्ष नहीं आया था, फिर भी कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस प्रयास की सराहना की और सरकारों को उनके कल्याण हेतु तत्काल सकारात्मक नीतिगत कदम उठाने का निर्देश दिया।

