Wednesday, September 9, 2026
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Hate Crime Investigation: अदालत के साथ लुका-छिपी क्यों कर रही नोएडा पुलिस?, तल्ख बोल-समझा लें, वरना मुसीबत में पड़ जाएंगे, पढ़ें

Hate Crime Investigation: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में 2021 में एक मुस्लिम मौलवी के साथ हुए कथित हेट क्राइम (Hate Crime) मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच पर कड़ी फटकार लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने काजीम अहमद शेरवानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि वे धारा 153B को लागू करने से पीछे क्यों हट रहे हैं? कोर्ट ने जांच अधिकारी (IO) के रवैये को “लुका-छिपी” (Hide and Seek) करार दिया क्योंकि बार-बार निर्देश देने के बावजूद FIR में नफरती अपराध से जुड़ी प्रमुख धाराएं नहीं जोड़ी गई थीं।

क्या है 2021 की घटना? (The Incident)

  • शिकायतकर्ता: 62 वर्षीय मुस्लिम मौलवी, काजीम अहमद शेरवानी।
  • घटना: जुलाई 2021 में, मौलवी नोएडा में बस का इंतजार कर रहे थे जब कुछ लोगों ने उन्हें लिफ्ट देने की पेशकश की। गाड़ी के अंदर उनके साथ धार्मिक आधार पर गाली-गलौज की गई, उनकी दाढ़ी खींची गई और टोपी उतार दी गई। अंत में उन्हें गाड़ी से बाहर फेंक दिया गया।
  • याचिका: पीड़ित ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया क्योंकि स्थानीय पुलिस ने हेट क्राइम की धाराओं के तहत मामला दर्ज नहीं किया था।

कोर्ट की नाराजगी की मुख्य वजह: धारा 153B का न होना

इस साल की शुरुआत में, उत्तर प्रदेश सरकार ने खुद स्वीकार किया था कि इस मामले में IPC की धारा 153B और 295A के तहत अपराध बनता है। इसके बावजूद
IO की लापरवाही सामने आई। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने आगे की जांच की अनुमति तो ली, लेकिन ताजा रिपोर्ट में धारा 153B (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन) को फिर से छोड़ दिया गया। कोर्ट ने सवाल किया कि नटराज जी (ASG), आपके जांच अधिकारी अदालत के साथ लुका-छिपी क्यों खेल रहे हैं? क्या आप धारा 153B से पीछे हट सकते हैं?

अफसरों को समझाएं, वरना मुसीबत होगी

  • सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों को अंतिम चेतावनी दी।
  • समन की तैयारी: कोर्ट उस ACP को व्यक्तिगत रूप से बुलाने वाला था जिसने यह रिपोर्ट तैयार की थी। हालांकि, सरकारी वकील (ASG के.एम. नटराज) के अनुरोध पर कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह का और समय दिया।
  • असंतोष: कोर्ट ने आधिकारिक आदेश में दर्ज किया कि वह पुलिस द्वारा दाखिल किए गए अनुपालन हलफनामे (Compliance Affidavit) से बिल्कुल संतुष्ट नहीं है।
  • कड़ी टिप्पणी: बेंच ने कहा, “अपने अधिकारियों को सलाह दें, अन्यथा वे बड़ी मुसीबत में पड़ जाएंगे।”

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
धारा 153Bराष्ट्रीय अखंडता के विरुद्ध आरोप या दावे (Hate Crime का प्रमुख हिस्सा)।
धारा 295Aधार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना।
कोर्ट की टिप्पणी“IO की कार्रवाई एक ‘गंभीर त्रुटि’ (Grave Error) है।”
अगली सुनवाई19 मई, 2026

हेट क्राइम और पुलिस की जवाबदेही

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि हेट क्राइम जैसे मामलों में पुलिस केवल सामान्य मारपीट की धाराएं लगाकर मामले को हल्का नहीं कर सकती। जब अपराध का आधार “धार्मिक पहचान” हो, तो FIR में उन विशिष्ट धाराओं का होना अनिवार्य है जो नफरती अपराधों को परिभाषित करती हैं।

न्याय की उम्मीद

यह मामला न केवल 62 वर्षीय मौलवी को न्याय दिलाने के बारे में है, बल्कि यह कानून के शासन (Rule of Law) को बनाए रखने के बारे में भी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पुलिस अधिकारियों की मनमानी और अदालती आदेशों की अधूरी तामील को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 19 मई को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या पुलिस ने अंततः सभी जरूरी धाराएं जोड़कर ‘पूर्ण अनुपालन’ सुनिश्चित किया है या नहीं।

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