Sunday, September 20, 2026
HomeHigh CourtMALEGAON BLAST: मालेगांव ब्लास्ट केस में सभी 7 आरोपी बरी…कोर्ट ने कहा-...

MALEGAON BLAST: मालेगांव ब्लास्ट केस में सभी 7 आरोपी बरी…कोर्ट ने कहा- सबूत नहीं मिले

MALEGAON BLAST: मालेगांव ब्लास्ट केस में 17 साल बाद मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।

सिर्फ शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते: कोर्ट

कोर्ट ने 31 जुलाई 2025 को इस मामले में सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस और भरोसेमंद सबूत नहीं मिले। सिर्फ शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और सिर्फ धारणा के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस केस में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धाराएं लागू नहीं होतीं। फैसला सुनते वक्त सभी आरोपी कोर्ट में मौजूद थे और उन्होंने राहत की सांस ली। उन्होंने जज और अपने वकीलों का धन्यवाद किया।

यह था मामला

29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल में बम लगाकर धमाका किया गया था। इसमें 6 लोगों की मौत हुई थी और 101 लोग घायल हुए थे। कोर्ट ने कहा कि यह साबित नहीं हो सका कि धमाका जिस बाइक से हुआ, वह साध्वी प्रज्ञा की थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि बम विस्फोट हुआ था, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि विस्फोटक मोटरसाइकिल में लगाया गया था।

यह हैं बरी होनेवाले आरोपी

जिन 7 आरोपियों को बरी किया गया, वे हैं: साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय (रिटायर्ड), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी।

फैसले के अहम बिंदु

  • कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा।
  • 323 गवाहों में से 37 गवाह मुकर गए।
  • कोर्ट ने कहा कि सिर्फ शक के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती।
  • सरकार को मृतकों के परिवार को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश।

पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया

10 साल की फरहीन के पिता लियाकत शेख ने कहा कि यह फैसला स्वीकार नहीं है। वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा, “हम इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।”

जांच और ट्रायल

  • शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी, जिसने आरोपियों को अभिनव भारत संगठन से जोड़ा था।
  • बाद में केस एनआईए को सौंपा गया।
  • ट्रायल 2018 में शुरू हुआ और इस साल 19 अप्रैल को खत्म हुआ।
  • एनआईए ने कोर्ट में कहा था कि धमाका रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय में डर फैलाने के लिए किया गया था।

भाजपा ने फैसले का किया स्वागत

भाजपा ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि कांग्रेस ने “भगवा आतंक” की थ्योरी गढ़ी थी ताकि नरेंद्र मोदी के उदय को रोका जा सके। आरएसएस नेता सुनील अंबेकर ने कहा कि कोर्ट के फैसले से सच्चाई सामने आ गई है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि “आतंकवाद कभी भगवा नहीं था और न ही होगा।”

यह बोलीं साध्वी प्रज्ञा

साध्वी प्रज्ञा ने कहा- “यह सिर्फ मेरी नहीं, भगवा की जीत है।” उन्होंने कहा कि पिछले 17 सालों में उनका जीवन बर्बाद हो गया और जो लोग भगवा को बदनाम करना चाहते थे, उन्हें भगवान सजा देगा।

यह रहे अन्य नेताओं के बोल

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ना गलत है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने फैसले पर नाराजगी जताई और कहा कि जांच जानबूझकर कमजोर की गई। उन्होंने कहा कि धमाके में 6 नमाजी मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हुए थे। AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने राज्य सरकार से फैसले को चुनौती देने की मांग की। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि यह फैसला कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है और पार्टी को माफी मांगनी चाहिए।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
scattered clouds
29 ° C
29 °
29 °
89 %
0kmh
44 %
Sat
29 °
Sun
34 °
Mon
36 °
Tue
36 °
Wed
35 °

Recent Comments