Thursday, October 15, 2026
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Misuse of powers-II: राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ वकीलों के संगठन ने CJI को लिखा था पत्र; यहां जानें सारी बात

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • बार और बेंच में बढ़ता तनाव: एसोसिएशन के पत्र के अनुसार, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और वकीलों के बीच संवादहीनता (Lack of Communication) के कारण लगातार विवाद हो रहे थे। वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं (जैसे छोटे चैंबर/टीन शेड) के आवंटन पर भी सहयोग नहीं मिल रहा था।
  • स्थाई मुख्य न्यायाधीश की मांग: एडवोकेट्स एसोसिएशन ने मांग की थी कि अदालत की गरिमा और स्वस्थ न्यायिक माहौल बनाए रखने के लिए राज्य के बाहर से किसी स्थाई मुख्य न्यायाधीश (Permanent Chief Justice) की नियुक्ति जल्द की जाए और जस्टिस शर्मा का स्थानांतरण राजस्थान से बाहर किया जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति संदीप मेहता के पत्र: इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के जज जस्टिस संदीप मेहता (जो स्वयं भी राजस्थान से आते हैं) ने सीजेआई और कॉलेजियम को तीन पत्र लिखकर जस्टिस शर्मा के आचरण और शक्तियों के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठाए थे।
  • निष्ठा पर सवाल: जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में उल्लेख किया था कि उन्हें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली और निष्ठा (Integrity) को लेकर कई शिकायतें मिली हैं, जिसके आधार पर उन्हें तुरंत राज्य से बाहर ट्रांसफर किया जाना चाहिए।

जोधपुर/नई दिल्ली: राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता के आरोप सार्वजनिक होने से कई महीने पहले ही वकीलों के प्रमुख संगठन ने उनके तबादले की गुहार लगाई थी। ‘राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर’ ने अप्रैल माह में ही भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत को पत्र लिखकर जस्टिस एस.पी. शर्मा को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने और एक नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का अनुरोध किया था, ताकि “बार और बेंच के बीच सौहार्द” बना रहे।

एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी द्वारा 25 अप्रैल 2026 को भेजे गए इस पत्र में बार और बेंच के बीच बढ़ते तनाव, संवादहीनता और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी पर गहरी चिंता जताई गई थी।

यहां पढ़ें: Misuse of powers-I: CJI सूर्य कांत; राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ हो रही जांच, मीडिया में तय नहीं हो सकते आरोप

बार एसोसिएशन के पत्र के मुख्य बिंदु

एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने CJI सूर्य कांत को लिखे पत्र में मौजूदा प्रशासनिक हालात को रेखांकित करते हुए लिखा: “वर्तमान परिस्थितियों में बार और बेंच के बीच वांछित सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित नहीं हो पा रहे हैं। संवाद की कमी और वकीलों के साथ व्यवहार के कारण बार-बार असहमति और विवाद की स्थिति बन रही है। इसके अतिरिक्त, वकीलों की बुनियादी जरूरतों जैसे कि छोटे चैंबर/बैठक स्थल (उदा. 10×10 फीट के टिन शेड) उपलब्ध कराने के मुद्दों पर भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है, जिससे अधिवक्ताओं में गहरा असंतोष है।”

पत्र में आगे कहा गया: “अदालत की गरिमा, न्यायिक कार्य की निरंतरता और एक स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए जल्द से जल्द राजस्थान उच्च न्यायालय में एक स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करना नितांत आवश्यक हो गया है। प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को राजस्थान से बाहर स्थानांतरित करने पर विचार किया जाना चाहिए, जिससे बार और बेंच के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल पुनः स्थापित हो सके।”

यहां पढ़ें: Misuse of powers: राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को जस्टिस संदीप मेहता तुरंत हटाने की मांग क्यों कर रहे हैं? पत्र में हो रहा खुलासा

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता के आरोप

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप मेहता (जिनका मूल उच्च न्यायालय राजस्थान है) ने भी सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के सदस्यों को पत्रों की एक श्रृंखला (2, 10 और 17 अगस्त) लिखकर जस्टिस शर्मा के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए थे:

  • शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप: जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया कि उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट के साथी जजों और अन्य स्रोतों से कई शिकायतें मिली हैं, जो कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की सत्यनिष्ठा (Integrity) और आचरण पर गंभीर संदेह पैदा करती हैं।
  • तत्काल तबादले की मांग: जस्टिस मेहता ने संस्थान के हित का हवाला देते हुए जस्टिस शर्मा को तुरंत राज्य से बाहर स्थानांतरित करने और किसी अन्य उच्च न्यायालय से नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया था।

पृष्ठभूमि

यह नया खुलासा दर्शाता है कि राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायिक प्रशासन और बार के बीच गतिरोध लंबे समय से बना हुआ था। हाल ही में इन आंतरिक पत्रों के मीडिया में आने के बाद सीजेआई सूर्य कांत ने स्पष्ट किया था कि आरोपों की जांच उचित संस्थागत तंत्र के तहत की जा रही है और कोलेजियम नियमित मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर विचार कर रहा है।

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन का मुख्य बयान

एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजीत जोशी ने CJI सूर्यकांत को लिखे पत्र में कहा था: “वर्तमान परिस्थितियां बार और बेंच के बीच अपेक्षित सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित नहीं कर पा रही हैं। वकीलों के साथ संवादहीनता और व्यवहार के कारण आए दिन मतभेद हो रहे हैं। न्यायालय की गरिमा और सुचारू न्यायिक माहौल बनाए रखने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का राज्य से बाहर तबादला किया जाना बेहद आवश्यक है।”

Misuse of powers-II: एट ए ग्लान्स (At a Glance of Issue)

विवरणजानकारी
संबंधित उच्च न्यायालयराजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court)
संबंधित न्यायाधीशकार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा (Acting CJI SP Sharma)
शिकायतकर्ता संगठनराजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर (President: Ranjeet Joshi)
सुप्रीम कोर्ट से शिकायतसुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta)
मुख्य मुद्दाबार-बेंच के बीच संवादहीनता, प्रशासनिक कार्यप्रणाली व निष्ठा (Integrity) पर सवाल
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