Thursday, June 25, 2026
HomeScam NoseOpen Court: आपको पता है राजस्थान सिविल सेवा ट्रिब्यूनल का स्टे ऑर्डर’...

Open Court: आपको पता है राजस्थान सिविल सेवा ट्रिब्यूनल का स्टे ऑर्डर’ गायब हो गया…यह तो न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है, पढ़ें पूरा केस

Open Court: राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण के रिकॉर्ड से एक सरकारी शिक्षक के पक्ष में जारी अंतरिम रोक का आदेश रहस्यमय तरीके से गायब हो गया।

ट्रिब्यूनल की पूरी कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस तरह अंतरिम आदेश की जगह राहत खारिज करने वाला दूसरा आदेश आने के मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इसे न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ मानते हुए ट्रिब्यूनल की पूरी कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस रवि चिरानिया ने ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार द्वारा एक ‘अनाम क्लर्क’ (उल्लेख न किए गए बाबू) पर सारा दोष मढ़ने की सफाई को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे “प्रथम दृष्टया झूठा” करार दिया। अदालत ने कार्मिक विभाग (DoP) के सचिव को यह जांचने का जिम्मा सौंपा है कि क्या किसी निर्दोष कर्मचारी को वरिष्ठों को बचाने के लिए बलि का बकरा (Scapegoat) बनाया जा रहा है।

मामला क्या है?: खुली अदालत का ‘स्टे’ और फाइलों का ‘खेल’

यह चौंकाने वाला मामला सरकारी स्कूल के शिक्षक श्रवण लाल खोशवाल द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है।

9 साल पुराने प्रमोशन का विवाद: शिक्षक श्रवण लाल ने अपने ९ साल पुराने प्रमोशन (पदोन्नति) को निरस्त करने के सरकारी आदेश को ट्रिब्यूनल (RCSAT) में चुनौती दी थी।

खुली अदालत में मिला स्टे: याचिकाकर्ता के अनुसार, 15 जुलाई, 2025 को ट्रिब्यूनल ने खुली अदालत (Open Court) में दोनों पक्षों को सुनने के बाद उनके डिमोशन पर ‘स्टे’ दे दिया था। ट्रिब्यूनल की आधिकारिक वेबसाइट पर भी यही अपडेट दर्ज हुआ कि अंतरिम राहत प्रदान कर दी गई है।

सर्टिफाइड कॉपी में बड़ा उलटफेर: शिक्षक ने जब आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) मांगी, तो वह दंग रह गए। फाइल में 15 जुलाई का कोई स्टे ऑर्डर नहीं था, बल्कि उसकी जगह 8 अगस्त, 2025 की तारीख का एक नया आदेश लगा हुआ था। इस नए आदेश में उनकी अंतरिम राहत (Stay) को पूरी तरह खारिज कर दिया गया था और केवल नोटिस जारी किए गए थे। शिक्षक का दावा है कि 8 अगस्त को यह मामला ट्रिब्यूनल में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (List) तक नहीं था।

हाई कोर्ट में गुहार: पीड़ित शिक्षक ने इस “पीछे से किए गए खेल” को पूरी तरह अवैध और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए राजस्थान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मार्च 2026 में इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार को हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का कड़ा निर्देश दिया था।

हाई कोर्ट का कड़ा रुख: “रजिस्ट्रार की दलील पूरी तरह अतार्किक”

अप्रैल के मध्य में हुई अगली सुनवाई के दौरान जस्टिस रवि चिरानिया ने रजिस्ट्रार द्वारा दाखिल स्पष्टीकरण को पूरी तरह असंतोषजनक पाया।

क्लर्क पर दोष मढ़ने की कोशिश: रजिस्ट्रार ने अपने हलफनामे में दावा किया कि ‘स्टे मिलने’ की बात वेबसाइट या कॉज़ लिस्ट में केवल एक क्लर्क (बाबू) की गलती या मानवीय त्रुटि के कारण दर्ज हो गई थी।

अदालत की तल्ख टिप्पणी: कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि रजिस्ट्रार ने अपने हलफनामे में उस क्लर्क का नाम तक नहीं बताया है। न्यायाधीश ने कहा, “रजिस्ट्रार द्वारा एक अनाम क्लर्क पर पूरा दोष मढ़ने का प्रयास अत्यधिक अतार्किक (Highly Unreasonable) है और यह रिकॉर्ड के आधार पर सीधे तौर पर झूठा प्रतीत होता है। यह जांचना बेहद जरूरी है कि क्या वह क्लर्क वास्तव में इस प्रक्रिया में शामिल था या उसे केवल मोहरा बनाया जा रहा है।”

विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश

राजस्थान हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

कार्मिक सचिव को आदेश: राज्य के कार्मिक विभाग (Department of Personnel) के सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे ट्रिब्यूनल के कामकाज और इस पूरे हेरफेर की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच कराएं।

रजिस्ट्रार पर कार्रवाई पर विचार: कोर्ट ने सरकार से कहा कि वे ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार और इस विसंगति के लिए जिम्मेदार किसी भी अन्य उच्चाधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) करने पर विचार करें।

रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा: अदालत ने कार्मिक विभाग को अगली सुनवाई तक इस जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

हाई कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, इस बेहद संवेदनशील और न्यायपालिका की साख से जुड़े मामले की अगली सुनवाई मुकर्रर की गई है।

केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Overview)

कानूनी और प्रशासनिक बिंदुराजस्थान उच्च न्यायालय की विधिक कार्यवाही (अप्रैल-जून 2026)
संबंधित अदालतराजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस रवि चिरानिया (पूर्व में जस्टिस आनंद शर्मा)
याचिकाकर्ता (वादी)श्रवण लाल खोशवाल (सरकारी स्कूल शिक्षक)
जांच के दायरे में संस्थानराजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (RCSAT)
मुख्य विधिक विवादखुली अदालत में दिए गए ‘स्टे ऑर्डर’ का गायब होना और बैक-डेट (8 अगस्त) से राहत खारिज करने वाले आदेश का रिकॉर्ड में शामिल होना।
अदालत का अंतरिम निर्देशकार्मिक विभाग के सचिव को ट्रिब्यूनल की जांच करने और रजिस्ट्रार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश।
अगली सुनवाई की तिथि1 जुलाई, 2026
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
37 ° C
37 °
37 °
33 %
1.3kmh
90 %
Thu
44 °
Fri
46 °
Sat
46 °
Sun
44 °
Mon
41 °

Recent Comments