दिल्ली कार्यालय के 8 मुख्य कार्य और उद्देश्य
- गोपनीय संचार: हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बीच सीधे संवाद, संवेदनशील मामलों और गोपनीय पत्राचार के लिए एक सुरक्षित चैनल बनाना।
- सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से संपर्क: सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री, न्याय विभाग (Department of Justice), संवैधानिक निकायों और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखना।
- राष्ट्रीय स्तर का समन्वय: उन प्रशासनिक व संस्थागत मामलों का निपटारा करना जिनके लिए दिल्ली में केंद्रीय एजेंसियों से तालमेल की आवश्यकता होती है।
- स्टैंडिंग काउंसिल से समन्वय: सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट का पक्ष रखने वाले स्टैंडिंग काउंसिल और अन्य वकीलों के साथ समन्वय स्थापित करना।
- मामलों की निगरानी: सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट से जुड़े मुकदमों की प्रगति की निगरानी करना और समय पर रिकॉर्ड, निर्देश व प्रतिक्रियाएं भेजना।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन: उच्चतम न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों और आदेशों का त्वरित अनुपालन सुनिश्चित करना।
- प्रशासनिक सहायता: राष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक संस्थागत और प्रशासनिक कार्यों को गति देना।
- मुख्य न्यायाधीश के निर्देश: समय-समय पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) द्वारा सौंपे गए अन्य कार्यों का संपादन करना।
श्रीनगर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में भारत के सर्वोच्च न्यायालय, केंद्रीय मंत्रालयों और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं के साथ न्यायिक एवं प्रशासनिक संवाद को तीव्र व त्रुटिरहित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, जम्मू-कश्मीर बिक्री कर अपीलीय अधिकरण (Sales Tax Appellate Tribunal) के अध्यक्ष अमित कुमार गुप्ता को आगामी आदेशों तक नई दिल्ली स्थित इस रेजिडेंट कार्यालय के रजिस्ट्रार (मुख्यालय), नई दिल्ली के रूप में कार्य करने का दायित्व सौंपा गया है। उच्च न्यायालय ने औपचारिक रूप से नई दिल्ली में अपने एक ‘रेजिडेंट ऑफिस’ (Resident Office) की स्थापना को मंजूरी दी है। यह कार्यालय सीधे मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के पर्यवेक्षण में काम करेगा और इसकी रिपोर्टिंग रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से होगी।
नई दिल्ली रेजिडेंट ऑफिस के मुख्य कार्य और उद्देश्य
उच्च न्यायालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस कार्यालय की स्थापना निम्नलिखित प्रमुख दायित्वों के निर्वहन हेतु की गई है:
- संवेदनशील और गोपनीय पत्राचार का सुरक्षित चैनल: उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के बीच सीधा समन्वय स्थापित करना तथा अत्यंत संवेदनशील व गोपनीय दस्तावेजों के सुरक्षित पारेषण (Secure Transmission) की व्यवस्था बनाए रखना।
- राष्ट्रीय स्तर पर नियमित संपर्क (Liaison): सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय (Department of Justice), संवैधानिक प्राधिकरणों, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमियों और नई दिल्ली स्थित विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के साथ लगातार प्रशासनिक संपर्क बनाए रखना।
- संस्थागत समन्वय: राष्ट्रीय स्तर पर आवश्यक अंतर-संस्थागत, अंतर-राज्यीय और प्रशासनिक मामलों के त्वरित निस्तारण में सहयोग देना।
- स्थायी वकीलों के साथ समन्वय: सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट की ओर से पैरवी करने वाले स्टैंडिंग काउंसिल (Standing Counsel) और अन्य विशेष वकीलों के साथ ब्रीफिंग, निर्देशों के आदान-प्रदान और बहस का निरंतर समन्वय करना।
- केस मॉनिटरिंग और रिकॉर्ड पारेषण: शीर्ष अदालत में हाईकोर्ट से संबंधित मुकदमों की प्रगति पर कड़ी निगरानी रखना और समय पर निचली अदालतों के रिकॉर्ड, जवाब, टिप्पणियां और शपथपत्र पहुंचाना सुनिश्चित करना।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले नीतिगत निर्देशों, सर्कुलरों और न्यायिक आदेशों का उच्च न्यायालय के स्तर पर समयबद्ध अनुपालन (Compliance) सुगम बनाना।
- प्रशासनिक दक्षता: केंद्र सरकार के साथ संयुक्त परियोजनाओं (जैसे ई-कोर्ट मिशन, न्यायिक अवसंरचना और बजट आवंटन) का प्रभावी फॉलो-अप करना।
- अतिरिक्त दायित्व: मुख्य न्यायाधीश द्वारा समय-समय पर सौंपे जाने वाले अन्य सभी प्रशासनिक और संस्थागत कार्यों का निष्पादन करना।
प्रशासनिक महत्व और न्यायिक प्रभाव
- भौगोलिक दूरी और विशेष संवेदनशीलता का समाधान: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों की भौगोलिक स्थिति और शीतकाल/ग्रीष्मकाल में राजधानी बदलाव (दरबार मूव की पूर्व परंपरा) के बाद दोनों विंग्स (श्रीनगर और जम्मू) के कारण नई दिल्ली से त्वरित संवाद में आने वाली चुनौतियों को यह कार्यालय दूर करेगा।
- अपीलों और एसएलपी का त्वरित प्रबंधन: सुप्रीम कोर्ट में उच्च न्यायालय के प्रशासनिक निर्णयों या न्यायिक फैसलों के खिलाफ दायर होने वाली विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) में रिकॉर्ड मंगवाने या पैरवी करने में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी।
- न्यायिक अवसंरचना परियोजनाओं को गति: न्याय विभाग (Department of Justice) से मिलने वाले केंद्रीय अनुदान, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTSCs) और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में नई न्यायिक बुनियादी सुविधाओं के प्रस्तावों को इस कार्यालय के जरिए गति मिलेगी।
विधिक एवं प्रशासनिक विवरण
- संस्थान: जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय (High Court of Jammu & Kashmir and Ladakh)
- अधिसूचित पद: रजिस्ट्रार (मुख्यालय), नई दिल्ली [Registrar (Headquarters), New Delhi]
- नामित अधिकारी: अमित कुमार गुप्ता (अध्यक्ष, जेएंडके सेल्स टैक्स अपीलीय अधिकरण)
- प्रासंगिक संवैधानिक प्रावधान: भारत का संविधान – अनुच्छेद 229 (उच्च न्यायालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रशासनिक व्यय के संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश की अंतर्निहित शक्तियां) एवं अनुच्छेद 225
- प्रशासनिक नियंत्रण: मुख्य न्यायाधीश, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय (रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से)
मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय |
| नया कार्यालय | नई दिल्ली में ‘रेजिडेंट ऑफिस’ (Resident Office) |
| प्रभारी अधिकारी | अमित कुमार गुप्ता (रजिस्ट्रार – मुख्यालय, नई दिल्ली) |
| रिपोर्टिंग | रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से सीधे मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) को |
| मुख्य उद्देश्य | सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय मंत्रालयों और हाईकोर्ट के बीच समन्वय बनाना। |

