Monday, May 18, 2026
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Failed relationship: शादीशुदा महिला ने अपनी मर्जी से आरोपी के साथ दो रातें बिताईं, फिर जबरदस्ती कैसी…यह रही कोर्ट की टिप्पणी

Failed relationship: केरल हाईकोर्ट ने एक रेप केस में अग्रिम जमानत पर गंभीर टिप्पणी देते हुए कहा, सिर्फ इसलिए कि कोई रिलेशनशिप बाद में खराब हो गया, रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

महिला ने मर्जी से बिताई रातें

हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी 27 साल के एक युवक की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) के तहत एक शादीशुदा महिला से रेप का आरोप है। कहा कि शादीशुदा महिला ने अपनी मर्जी से आरोपी के साथ दो रातें बिताईं, जबरदस्ती के कोई सबूत नहीं हैं।

महिला ने पांच महीने बाद दर्ज कराई शिकायत

तीसरे साल की मेडिकल स्टूडेंट महिला ने शिकायत में कहा कि आरोपी ने 3 और 4 नवंबर 2024 को कोझिकोड जिले के थमारसेरी के पास एक होटल में उसके साथ रेप किया। यह शिकायत घटना के पांच महीने बाद दर्ज कराई गई। आरोपी ने कोर्ट में कहा कि दोनों के बीच सहमति से संबंध थे, जो बाद में बिगड़ गए।

महिला ने खुद की थी यात्रा, सोशल मीडिया पर भी संपर्क में थी

कोर्ट ने महिला के बयान का विश्लेषण करते हुए पाया कि वह खुद तिरुवनंतपुरम से कोझिकोड आई थी और दो रातों तक अलग-अलग लॉज में आरोपी के साथ रुकी थी। इसके अलावा, वह इंस्टाग्राम और स्नैपचैट पर लगातार आरोपी के संपर्क में भी थी।

कोर्ट ने कहा- जबरदस्ती का कोई मामला नहीं बनता

जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा, “ऐसा नहीं माना जा सकता कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध महिला की मर्जी के बिना बने। सिर्फ इसलिए कि सहमति से बना रिश्ता बाद में खराब हो गया, रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला पहले से शादीशुदा है, इसलिए शादी का झांसा देकर सहमति लेने का मामला भी नहीं बनता।

कस्टडी की जरूरत नहीं, सशर्त अग्रिम जमानत मंजूर

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है। इसलिए उसे अग्रिम जमानत दी जाती है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। आरोपी को जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा, शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं करना होगा और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करनी होगी।

रिलेशनशिप में रेप का आरोप लगाने से पहले सावधानी जरूरी

जस्टिस थॉमस ने कहा, “जब दो युवा अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाते हैं और बाद में उस पर रेप का आरोप लगाया जाता है, तो कोर्ट को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। बिना परिस्थितियों को समझे जमानत से इनकार करना अन्याय हो सकता है और युवाओं का भविष्य बर्बाद कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि झूठे या बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए आरोपों से कानूनी सुरक्षा को बचाना जरूरी है।

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