Thursday, October 29, 2026
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ASO Paper Leak: ASO परीक्षा पेपर लीक मामला…मेहनती युवाओं के भरोसे पर चोट करते हैं आरोपी, 14 आरोपियों की बेल पर क्या रहा आदेश

केस मैट्रिक्स: Orissa High Court Ruling on ASO Paper Leak Bail Applications

पहलूविवरण
संबंधित अदालतउड़ीसा उच्च न्यायालय (Orissa High Court, Cuttack)
माननीय पीठजस्टिस गौरीशंकर सतपथी (Single Bench)
संबंधित परीक्षाउड़ीसा हाई कोर्ट ASO भर्ती परीक्षा 2024-25
लागू कानूनBNS (धारा 316, 318, 111 – संगठित अपराध) एवं BNSS धारा 193(9)
मुख्य कानूनी बिंदुपेपर लीक और परीक्षा में धांधली साधारण अपराध नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक-आर्थिक अपराध हैं।
अंतिम निर्णय14 आरोपियों की जमानत याचिकाएं पूरी तरह खारिज।

ASO Paper Leak: सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के बढ़ते मामलों पर उड़ीसा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

पेपर लीक सिंडिकेट और भ्रष्ट एजेंसियों की गतिविधियों को सीधा हमला

हाईकोर्ट के जस्टिस गौरीशंकर सतपथी की एकल पीठ ने निचली अदालत (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, कटक) द्वारा जमानत खारिज किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपियों की जमानत याचिकाओं को निरस्त कर दिया। उड़ीसा हाई कोर्ट की असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) परीक्षा 2024-25 का प्रश्नपत्र और मॉडल उत्तर लीक करने के आरोप में गिरफ्तार 14 आरोपियों की जमानत याचिकाओं को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने पेपर लीक सिंडिकेट और भ्रष्ट एजेंसियों की गतिविधियों को “सामाजिक ताने-बाने और मेधा (Meritocracy) पर सीधा हमला” करार दिया।

मामला क्या था?: निजी एजेंसी की साज़िश और रद्द हुई मुख्य परीक्षा

पृष्ठभूमि: उड़ीसा हाई कोर्ट स्थापना द्वारा ASO भर्ती 2024-25 के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा OMR प्रारूप में हुई, जिसमें 20,260 उम्मीदवार शामिल हुए। परीक्षा आयोजित करने का जिम्मा M/s. Silicon Techlab Pvt. Ltd, Bhubaneswar नामक आउटसोर्स एजेंसी को दिया गया था।

मुख्य परीक्षा में गड़बड़ी: एजेंसी ने 13 जुलाई 2025 को मुख्य परीक्षा (Mains Examination) आयोजित कराई और 12 अगस्त 2025 को 2,120 सफल उम्मीदवारों की सूची हाई कोर्ट को सौंपी।

जांच और एफआईआर: जांच में बड़े पैमाने पर गोपनीयता के उल्लंघन, अनियमितता और पेपर लीक का खुलासा हुआ। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (परीक्षा) की शिकायत पर पुलिस ने एजेंसी से जुड़े और बिचौलिए के रूप में काम कर रहे आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

बीएनएस (BNS) की धाराएं: पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 316(5) (विश्वासघात), 318(4) (धोखाधड़ी), 61(2) (आपराधिक साजिश), 111 (संगठित अपराध) और 3(5) के तहत चार्जशीट दाखिल की।

आरोपियों की कार्यप्रणाली (Modus Operandi)

जांच में सामने आया कि आरोपी उम्मीदवारों को झांसा देकर प्रति अभ्यर्थी ₹2 लाख से ₹4 लाख रुपये वसूलते थे। अभ्यर्थियों को गुप्त कोचिंग सेंटरों/ठिकानों पर रखकर लीक हुए प्रश्नपत्र और हाथ से लिखे मॉडल उत्तर रटवाए जाते थे। मुख्य आरोपियों के लैपटॉप से डिजिटल साक्ष्य मिटाने और संदिग्धों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) में अभ्यर्थियों से बातचीत के ठोस प्रमाण मिले।

उड़ीसा हाई कोर्ट की मुख्य विधिक व्याख्याएं

पेपर लीक समाज के खिलाफ एक बड़ा सामाजिक-आर्थिक अपराध है

जस्टिस गौरीशंकर सतपथी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता और युवाओं के भविष्य का जिक्र करते हुए सख्त टिप्पणी की, प्रश्नपत्र लीक करना और मॉडल उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराना निस्संदेह मेधावी उम्मीदवारों के मनोबल को तोड़ता है। यह कोई साधारण आपराधिक कृत्य नहीं है; यह समाज के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने पर सीधा हमला है। संगठित पेपर लीक सिंडिकेट लाखों मेहनती युवाओं के विश्वास को चकनाचूर कर देते हैं। कोई भी सभ्य समाज भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटना को स्वीकार नहीं कर सकता।

संस्थायों और जन-विश्वास को गहरा नुकसान

अदालत ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सर्वोच्च स्तर की पारदर्शिता और ईमानदारी की आवश्यकता होती है। जब कोई आउटसोर्स एजेंसी या बिचौलिया पैसों के लालच में पूरी प्रक्रिया को दूषित करता है, तो इससे ईमानदार और योग्य अभ्यर्थी अपने आजीविका के अधिकार से वंचित हो जाते हैं, जिससे जनता में गहरा असंतोष फैलता है।

आपराधिक पृष्ठभूमि और साक्ष्य मिटाने का प्रयास

कोर्ट ने पाया कि जमानत मांग रहे कई आरोपियों का पहले भी पेपर लीक और परीक्षा धांधली में आपराधिक इतिहास (Criminal Antecedents) रहा है—वे ओडिशा सब-इंस्पेक्टर पुलिस परीक्षा और ओडिशा शिक्षक पात्रता परीक्षा (OTET) के पेपर लीक में भी शामिल रहे थे। इसके अलावा, लैपटॉप डेटा फॉर्मेट कर डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने का भी प्रयास किया गया था।

हाई कोर्ट का अंतिम निर्णय

जमानत याचिकाएं खारिज: मामले की गंभीरता, एकत्र किए गए साक्ष्यों, संगठित अपराध (Organised Crime) के तत्वों और आरोपियों के आपराधिक इतिहास को देखते हुए अदालत ने सभी 14 आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

सख्त संदेश: अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच की शुरुआती स्थिति में ऐसे गंभीर संगठित अपराध के आरोपियों को रिहा करने से निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

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