केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | इलाहाबाद उच्च न्यायालय का विधिक निर्णय (2026) |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (खंडपीठ) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस अजीत कुमार एवं जस्टिस गरिमा प्रसाद |
| केस संदर्भ | अवैध हिरासत याचिका (थाना भालुआनी, देवरिया) |
| मुख्य विधिक प्रश्न | थानों में सीसीटीवी व पावर बैकअप खराब होने के लिए कौन जवाबदेह है? |
| अदालत का विधिक स्टैंड | थानों में सीसीटीवी और बैकअप बंद होना एसपी/एसएसपी की कर्तव्यहीनता है। |
| डीजीपी यूपी को निर्देश | पूरे राज्य के थानों में आवश्यक उपकरण व बैकअप सुनिश्चित करने हेतु गाइडलाइंस जारी करें। |
| अगली सुनवाई की तिथि | 11 अगस्त 2026 (एसपी देवरिया व SHO को व्यक्तिगत पेशी का आदेश) |
Dereliction of Duty: पुलिस स्टेशनों में मानवाधिकारों की रक्षा और सीसीटीवी निगरानी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया है।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने देवरिया जिले के भालुआनी थाने में अवैध हिरासत (Illegal Detention) के एक मामले की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पूरे राज्य के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि थानों में बंद पड़े सीसीटीवी (CCTV) कैमरे, जनरेटर और सोलर पैनल जैसे पावर बैकअप का खराब होना सीधे तौर पर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP / SSP) की कर्तव्यहीनता (Dereliction of Duty) को दर्शाता है।
विधिक पृष्ठभूमि: अवैध हिरासत का आरोप और बिजली न होने का बहाना
- यह मामला देवरिया के भालुआनी थाने में एक व्यक्ति को अवैध रूप से लॉक-अप में रखने की याचिका से जुड़ा है।
- थाना प्रभारी (SHO) का बहाना: जब कोर्ट ने घटना वाले दिन का सीसीटीवी फुटेज मांगा, तो SHO ने जवाब दिया कि उस दिन बिजली की कटौती थी और थाने का जनरेटर खराब था, इसलिए सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
- बिजली विभाग का खुलासा: कोर्ट के आदेश पर जब पावर कॉरपोरेशन से रिकॉर्ड मांगा गया, तो अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) ने खुलासा किया कि उस दिन इलाके में 13 घंटे से अधिक बिजली उपलब्ध थी।
- दस्तावेजी लापरवाही: एसपी देवरिया के हलफनामे से सामने आया कि थाने का जनरेटर दिसंबर 2024 से खराब पड़ा था और सोलर पैनल भी बंद थे। इसके बावजूद ना तो SHO और ना ही किसी अन्य अधिकारी ने इसे ठीक कराने के लिए कोई पत्राचार या प्रयास किया।
हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: “संवेदनशील स्थान हैं पुलिस स्टेशन”
इलाहाबाद हाई कोर्ट की पीठ ने पुलिस अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए निम्नलिखित विधिक सिद्धांत तय किए।
SP / SSP की प्राथमिक जवाबदेही
अदालत ने कहा कि पुलिस स्टेशन एक अत्यंत “संवेदनशील स्थान” है और वहां 24 घंटे निर्बाध बिजली व सीसीटीवी चालू रखना एसपी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
“यह जिला पुलिस अधीक्षक (SP) या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) का प्राथमिक कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि थानों में दिए गए जनरेटर सेट चालू स्थिति में हों और बैकअप के माध्यम से सीसीटीवी कैमरों को बिजली मिले। यदि थानों में सीसीटीवी कैमरे और बिजली बैकअप के साधन काम नहीं कर रहे हैं, तो यह एसपी द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही (Dereliction of Duty) है।“
SHO की समान जवाबदेही और जांच के आदेश
कोर्ट ने पाया कि वर्तमान थाना प्रभारी जो 31 अगस्त 2025 से तैनात हैं, उन्होंने भी जनरेटर ठीक कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि एसपी देवरिया ने SHO के इस आचरण को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) के आदेश दे दिए हैं।
यूपी डीजीपी (DGP) को निर्देश
पीठ ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे राज्य के सभी जनपदों के पुलिस आयुक्तों (Commissioners), एसएसपी और एसपी को तुरंत सर्कुलर जारी करें कि प्रदेश का हर थाना अनुशासन और उचित संचालन के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं से पूरी तरह सुसज्जित रहे।
अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत पेशी का आदेश
अदालत ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं।
- साक्ष्य निष्कर्षण: थाने के सीसीटीवी हार्ड डिस्क से फुटेज निकालकर पेन ड्राइव (Pen Drive) के माध्यम से कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए।
- व्यक्तिगत उपस्थिति: एसपी देवरिया और भालुआनी के थाना प्रभारी (SHO) दोनों को अगली सुनवाई की तिथि 11 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया गया है।
- ज़िला रिपोर्ट: एसपी को देवरिया जिले के सभी थानों में लगे जनरेटर सेट, सोलर पैनल और सीसीटीवी कैमरों की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट कोर्ट में सौंपनी होगी।

