हाईकोर्ट का विश्लेषण और पासपोर्ट नियमों की व्याख्या
- विदेश मंत्रालय (MEA) का 2015 का सर्कुलर: हाईकोर्ट ने विदेश मंत्रालय के 2015 के सर्कुलर का हवाला दिया। हालांकि यह सर्कुलर सामान्य तौर पर 5 साल के बाद जन्मतिथि बदलने पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन नाबालिगों (Minors) के मामले में विशेष छूट का प्रावधान करता है।
- पासपोर्ट अधिकारी की चूक: कोर्ट ने पाया कि जब पहला पासपोर्ट जारी हुआ था तब आवेदक नाबालिग था। पासपोर्ट अधिकारी ने अपने ही मंत्रालय के सर्कुलर में दिए गए इस विशेष अपवाद और 10वीं के आधिकारिक मैट्रिक प्रमाण पत्र की अनदेखी की।
अदालत का निर्णय (Mandamus Directive)
हाईकोर्ट ने परमादेश रिट (Writ of Mandamus) जारी करते हुए पासपोर्ट प्राधिकारी (प्रतिवादी संख्या 2) को निर्देश दिया कि वे आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह (2 weeks) के भीतर 10वीं के मैट्रिक्युलेशन सर्टिफिकेट के आधार पर सही जन्मतिथि (25 मई 2008) के साथ नया पासपोर्ट जारी करने के आवेदन पर निर्णय लें।
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने पासपोर्ट अधिकारियों को स्कूल और जन्म रिकॉर्ड में सुधार के बावजूद एक नाबालिग छात्र के पासपोर्ट में गलत जन्मतिथि (Date of Birth) बनाए रखने के रवैये पर हस्तक्षेप करते हुए पासपोर्ट प्राधिकरण को नए पासपोर्ट के आवेदन पर 2 सप्ताह के भीतर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति संजय परिहार की एकल पीठ ने 2 सितंबर 2026 के अपने आदेश में याचिका स्वीकार करते हुए पासपोर्ट अधिकारियों के खिलाफ परमादेश (Writ of Mandamus) जारी किया। अदालत ने विदेश मंत्रालय (MEA) के 2015 के सर्कुलर का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि 5 साल की सामान्य समयसीमा नाबालिगों (Minors) के मामलों में लागू नहीं होती और उनके लिए नियमों में विशेष छूट दी गई है [मोहम्मद फजली इलाही बनाम भारत संघ एवं अन्य]।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां
1. विदेश मंत्रालय (MEA) के 2015 सर्कुलर में नाबालिगों को विशेष छूट पासपोर्ट नियमों और जन्मतिथि सुधार की समयसीमा का विश्लेषण करते हुए पीठ ने कहा: “पासपोर्ट अधिकारी को विदेश मंत्रालय के अपने ही 2015 सर्कुलर पर विचार करना चाहिए था, जिसमें उन व्यक्तियों के लिए विशेष छूट (Special Concession) दी गई है जो गलत जन्मतिथि वाला पासपोर्ट जारी होते समय नाबालिग थे। यद्यपि सर्कुलर सामान्यतः 5 साल बाद जन्मतिथि में बदलाव को प्रतिबंधित करता है, लेकिन नाबालिगों के मामले को इस सीमा से स्पष्ट रूप से छूट दी गई है।”
2. सक्षम प्राधिकारियों द्वारा सुधारे गए रिकॉर्ड की अनदेखी अनुचित
- अदालत ने दर्ज किया कि याचिकाकर्ता के स्कूल रिकॉर्ड, 10वीं/12वीं के प्रमाण पत्र और जनवरी 2026 में जारी नए जन्म प्रमाण पत्र में सक्षम प्राधिकारियों द्वारा विधिवत सुधार किया जा चुका है।
- पुराना जन्म प्रमाण पत्र, जिसके आधार पर पासपोर्ट जारी हुआ था, सक्षम प्राधिकारी द्वारा पहले ही रद्द (Cancelled) किया जा चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि (किर्गिज गणराज्य में मेडिकल प्रवेश का मामला)
- विवाद की शुरुआत: याचिकाकर्ता के पुराने पासपोर्ट में जन्मतिथि 12 जुलाई 2004 दर्ज थी। प्रारंभिक स्तर पर स्कूल रिकॉर्ड में त्रुटिवश गलत तिथि दर्ज हो गई थी, जिसे निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद वर्ष 2018 में आधिकारिक रूप से सुधारकर 25 मई 2008 कर दिया गया।
- दस्तावेजी प्रमाण: याचिकाकर्ता के 10वीं, 11वीं और 12वीं के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों, पहचान पत्रों और जनवरी 2026 में जारी वैध जन्म प्रमाण पत्र में सही जन्मतिथि 25 मई 2008 दर्ज है।
- विदेश में मेडिकल की पढ़ाई: याचिकाकर्ता ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए किर्गिज गणराज्य (Kyrgyz Republic) के एक विश्वविद्यालय में मेडिकल प्रोग्राम (MBBS) में दाखिला हासिल किया है, जहां विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में भी उसकी जन्मतिथि 25 मई 2008 दर्ज है।
- पासपोर्ट अधिकारियों का इनकार: जब छात्र ने सही जन्मतिथि के साथ नए पासपोर्ट के लिए आवेदन किया, तो पासपोर्ट कार्यालय ने 5 साल की सामान्य सीमा का हवाला देते हुए बदलाव करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पिता के माध्यम से हाईकोर्ट का रुख किया गया।
हाईकोर्ट का अंतिम निर्देश (Writ of Mandamus)
- 2 सप्ताह में नया पासपोर्ट जारी करने पर निर्णय: उच्च न्यायालय ने पासपोर्ट अधिकारियों (विशेष रूप से प्रतिवादी संख्या 2) को निर्देश दिया कि वे आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के 10वीं (Matriculation) प्रमाण पत्र के आधार पर सही जन्मतिथि (25 मई 2008) दर्ज करते हुए नए पासपोर्ट के आवेदन पर विधि सम्मत सकारात्मक विचार करें।
- याचिका का निस्तारण: अदालत ने रिट याचिका और सभी लंबित अंतरिम आवेदनों का इसी निर्देश के साथ निस्तारण कर दिया।
“पासपोर्ट अधिकारी को अपने ही सर्कुलर पर विचार करना चाहिए था, जिसमें नाबालिगों के मामले में विशेष छूट दी गई है।” — न्यायमूर्ति संजय परिहार
विधिक विवरण
- केस शीर्षक: मोहम्मद फजली इलाही (नाबालिग, पिता के माध्यम से) बनाम भारत संघ एवं अन्य
- प्रासंगिक नियम: विदेश मंत्रालय (MEA) का 2015 पासपोर्ट जन्मतिथि संशोधन सर्कुलर एवं पासपोर्ट अधिनियम, 1967
- पीठ: न्यायमूर्ति संजय परिहार (आदेश की तारीख: 2 सितंबर 2026)
Age Factor: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय (श्रीनगर) |
| पीठासीन न्यायाधीश | न्यायमूर्ति संजय परिहार |
| याचिकाकर्ता | मोहम्मद फ़ज़ली इलाही (पिता के माध्यम से) |
| मुद्दा | पासपोर्ट में जन्मतिथि सुधार (12 जुलाई 2004 के स्थान पर सही तिथि 25 मई 2008 दर्ज करना) |
| अदालत का फैसला | याचिका स्वीकार; पासपोर्ट अधिकारी को 10वीं के प्रमाण पत्र के आधार पर 2 सप्ताह में नया पासपोर्ट जारी करने पर विचार का निर्देश। |

