Tuesday, October 27, 2026
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Divya Himachal: सच्चे तथ्यों का प्रकाशन और शिकायतकर्ता का स्पष्टीकरण छापना मानहानि नहीं; अखबार के संपादक के खिलाफ मानहानि का केस रद्द

हाईकोर्ट का विश्लेषण और मुख्य टिप्पणियां

अदालत ने ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड और प्रकाशित खबरों का अध्ययन करने के बाद निम्नलिखित मुख्य निष्कर्ष निकाले:

  • सत्यता और निष्पक्षता: कोर्ट ने पाया कि सैनी ने होमगार्ड कमांडेंट से NOC ली थी। अखबार के संवाददाता ने खबर छापने से पहले सैनी से उनका पक्ष जाना था और उनके स्पष्टीकरण को खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बाद की एक रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया था कि वह दोनों पदों पर रह सकते हैं।
  • हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणी:“चूंकि यह समाचार रिपोर्ट पूरी तरह से सत्य तथ्यों पर आधारित थी, और शिकायतकर्ता से स्पष्टीकरण लेकर उसी समाचार पत्र में प्रकाशित भी किया गया था, इसलिए याचिकाकर्ता द्वारा समाचार प्रकाशित करने के इस कार्य को शिकायतकर्ता की मानहानि नहीं माना जा सकता।” — न्यायमूर्ति संदीप शर्मा
  • साजिश का कोई सबूत नहीं: कोर्ट ने यह भी पाया कि शुरुआती सबूतों में ऐसा कुछ नहीं था जिससे यह साबित हो कि संपादक अनिल सोनी उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे या किसी आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) में शामिल थे।

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ‘दिव्य हिमाचल’ अखबार के संपादक अनिल सोनी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) की शिकायत और आरोप तय करने के आदेश को पूरी तरह निरस्त (Quash) कर दिया है।

न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की एकल पीठ ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए वर्ष 2013 की शिकायत संख्या 65 और ट्रायल कोर्ट द्वारा 3 मार्च 2023 को आरोप तय (Framing of Charges) करने के आदेश को खारिज कर दिया तथा संपादक को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने विधिक सिद्धांत दोहराते हुए कहा कि जब कोई समाचार रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से सही हो और पत्रकार ने प्रकाशन से पहले संबंधित व्यक्ति का पक्ष/स्पष्टीकरण लेकर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया हो, तो ऐसी खबर को मानहानिकारक (Defamatory) नहीं माना जा सकता [अनिल सोनी बनाम परवीन कुमार सैनी एवं अन्य]।

उच्च न्यायालय की प्रमुख विधिक टिप्पणियां

1. सत्यता और निष्पक्ष पत्रकारिता मानहानि के दायरे से बाहर अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि के अपवाद) के संदर्भ में कहा: “चूंकि जिस समाचार को मानहानिकारक बताया जा रहा है, वह वास्तविक और सच्चे तथ्यों (True Facts) पर आधारित था और प्रकाशन से पहले शिकायतकर्ता से स्पष्टीकरण मांगा गया था जिसे उसी समाचार पत्र में प्रकाशित भी किया गया, इसलिए याचिकाकर्ता द्वारा खबर प्रकाशित करने के कृत्य को किसी भी दृष्टि से शिकायतकर्ता को बदनाम करने वाला कृत्य नहीं कहा जा सकता।”

2. आपराधिक साजिश या व्यक्तिगत दुर्भावना का अभाव

  • अदालत ने पाया कि प्रारंभिक साक्ष्यों में ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि अखबार के संपादक उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे जहां चुनावी प्रतिद्वंद्वी ने आरोप लगाए थे।
  • संपादक और अन्य आरोपियों के बीच किसी आपराधिक साजिश (IPC 120-B) का कोई सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं था।
  • इसी शिकायत से जुड़े अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ भी पूर्व में न्यायिक कार्यवाहियों को उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किया जा चुका था।

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मामले की पृष्ठभूमि (2011 का ‘सदरपुर का प्रधान होमगार्ड का जवान’ विवाद)

  • विवाद की शुरुआत (सितंबर 2011): परवीन कुमार सैनी ग्राम पंचायत सदरपुर के प्रधान निर्वाचित हुए थे और वे साथ ही होमगार्ड जवान के रूप में भी सेवारत थे।
  • प्रेस कॉन्फ्रेंस और खबर: पंचायत चुनाव में पराजित प्रत्याशी मुल्ख राज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सैनी के दोनों पदों पर एक साथ रहने की पात्रता पर सवाल उठाए। ‘दिव्य हिमाचल’ अखबार ने 14 सितंबर 2011 को “सदरपुर का प्रधान होमगार्ड का जवान” शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया।
  • शिकायतकर्ता का पक्ष शामिल: अखबार के संवाददाता ने खबर छापने से पहले सैनी से संपर्क किया था और उनका यह पक्ष भी प्रकाशित किया था कि उन्होंने चुनाव लड़ने से पहले होमगार्ड्स कमांडेंट से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) प्राप्त किया था। बाद की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि वे दोनों पद संभाल सकते हैं।
  • मानहानि का मुकदमा: इसके बावजूद सैनी ने अखबार के संपादक और अन्य के खिलाफ IPC की धारा 500/501 (मानहानिकारक सामग्री छापना), 502 और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लेकर 3 मार्च 2023 को आरोप तय कर दिए थे, जिसे संपादक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय

  1. कार्यवाही और चार्जशीट निरस्त: शिकायत संख्या 65/2013 और 3 मार्च 2023 का आरोप तय करने का ट्रायल कोर्ट का आदेश पूरी तरह रद्द किया गया।
  2. संपादक दोषमुक्त (Acquitted): संपादक अनिल सोनी को सभी मानहानि आरोपों से मुक्त करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

विधिक विवरण

  • केस शीर्षक: अनिल सोनी बनाम परवीन कुमार सैनी एवं अन्य
  • प्रासंगिक धाराएं: धारा 482 CrPC, धारा 499, 500, 501, 502, 120-B IPC
  • पीठ: न्यायमूर्ति संदीप शर्मा (आदेश की तारीख: 7 अगस्त 2026)

Divya Himachal: मामले का संक्षिप्त विवरण (At a Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतहिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (Himachal Pradesh High Court)
पीठासीन न्यायाधीशन्यायमूर्ति संदीप शर्मा
याचिकाकर्ताअनिल सोनी (संपादक, दिव्य हिमाचल)
शिकायतकर्ताप्रवीन कुमार सैनी (सरपंच/प्रधान, ग्राम पंचायत सदरपुर)
मूल धाराएं (IPC)धारा 501, 502 और 120-B (मानहानिकारक सामग्री छापना और आपराधिक साजिश)
कोर्ट का आदेशशिकायत संख्या 65/2013 और 3 मार्च 2023 के आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द किया।

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