Wednesday, November 4, 2026
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COVID News: उप्र के अभिभावकों के लिए राहत जल्द, कोविड दौर में स्कूल फीस से छूट का केस फिर खुला…

COVID News: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न निजी स्कूलों की वित्तीय स्थिति की जांच करने के लिए एक समिति का गठन किया है, जिन्हें कोविड महामारी के दौरान छात्रों से ली गई अतिरिक्त फीस वापस करने का निर्देश दिया गया था।

हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी गठित

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई वाली पीठ ने प्रत्येक स्कूल की वित्तीय स्थिति का स्वतंत्र रूप से आकलन करने और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीपी मित्तल और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) अधीश मेहरा की सदस्यता वाली एक समिति बनाई। कहा, महामारी के दौरान, कई स्कूलों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, उनके पास अपर्याप्त अधिशेष धन था। जिससे कर्मचारियों की कमी हुई और शिक्षकों के वेतन में कटौती हुई। नतीजतन, उन्हें महत्वपूर्ण मानव संसाधन हानि का सामना करना पड़ा।

17 निजी स्कूल की वित्तीय जांच होगी

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के 17 निजी स्कूलों की वित्तीय स्थिति की जांच के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति का गठन किया, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान ली गई 15 प्रतिशत अतिरिक्त फीस को समायोजित करने या वापस करने के आदेश को चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कहा, इस मुद्दे में प्रत्येक मामले में तथ्यों और खातों की जांच की आवश्यकता है। इन परिस्थितियों में, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी पी मित्तल और चार्टर्ड अकाउंटेंट आदिश मेहरा की एक समिति गठित करते हैं, जो खातों की जांच करेगी और संबंधित अवधि के दौरान संबंधित स्कूलों की वित्तीय स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

कोविड के दौरान फीस का 15 प्रतिशत समायोजन का मामला

उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों को निर्देश दिया था कि वे 2020-2021 के दौरान अभिभावकों द्वारा भुगतान की गई फीस का 15 प्रतिशत समायोजित करें या प्रतिपूर्ति करें, जब महामारी अपने चरम पर थी।शीर्ष अदालत में 17 निजी स्कूलों ने याचिका दायर की थी। पीठ ने कहा कि प्रत्येक निजी स्कूल के तथ्यों और वित्तीय परिस्थितियों पर विचार किए बिना उच्च न्यायालय ने “व्यापक दृष्टिकोण” अपनाया और इसे लागू रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सीजेआई ने कहा, उच्च न्यायालय के आदेश ने बहुत व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है, यह संभव नहीं है, आपको प्रत्येक मामले पर गौर करना होगा। निजी स्कूलों ने तर्क दिया कि महामारी की अवधि के दौरान, कुछ स्कूलों में अधिशेष व्यय की कमी थी, कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन में कटौती के अलावा मानव संसाधन का नुकसान भी हुआ। स्कूलों ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में, उच्च न्यायालय के निर्देश को प्रत्येक स्कूल के वित्तीय खातों और उधारी पर विचार करते हुए लागू किया जाना था।

शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले के निर्देश पर लगाया रोक

पीठ ने याचिकाओं में नोटिस जारी करते हुए सभी विवादित स्कूलों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें यह दर्शाया गया हो कि क्या कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन में कमी आई है और क्या दिन-प्रतिदिन के संचालन व्यय में कमी आई है। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले के निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें फीस वापस करने का निर्देश दिया गया था। पैनल को व्यक्तिगत मामलों की जांच करने और स्वतंत्र रूप से वित्तीय स्थिति का निर्धारण करने का काम सौंपा गया था, अदालत ने स्कूलों को तीन सप्ताह के भीतर समिति को आवश्यक बिल प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

जनवरी 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया था निर्देश

संबंधित स्कूल संघ/अभिभावक प्रति प्रस्तुत करेंगे और उनकी बात सुनी जाएगी, समिति को आयकर रिटर्न सहित अन्य विवरण प्रस्तुत करने के लिए कहने का अधिकार होगा… समिति को प्रति स्कूल (न्यायमूर्ति मित्तल को) 1 लाख रुपये और प्रति स्कूल (सीए को) 75,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसने पैनल को चार महीने में अभ्यास समाप्त करने और अदालत में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा, जो 25 अगस्त के सप्ताह में मामले को उठाएगी। जनवरी 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विभिन्न निजी स्कूलों को निर्देश दिया था कि वे महामारी के दौरान छात्रों से लिए गए अतिरिक्त पैसे को समायोजित करें या वापस करें। हालांकि, निजी स्कूल उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए शीर्ष अदालत चले गए।

प्रत्येक मामले को स्वतंत्र रूप से देखने की आवश्यकता पर बल दिया…

मई 2023 में, सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद, शीर्ष अदालत ने इस मामले में पहले की विभिन्न सुनवाई में कुछ स्कूलों को संबंधित अवधि के अपने बैलेंस शीट और लाभ और हानि खातों की एक प्रति के साथ हलफनामा दायर करने का निर्देश जारी किया था। मंगलवार को, शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया था। दूसरी ओर, शीर्ष अदालत ने प्रत्येक मामले को स्वतंत्र रूप से देखने की आवश्यकता पर बल दिया। अदालत ने कहा कि इस बीच, उच्च न्यायालय के निर्देश पर रोक लगाने वाला अंतरिम आदेश जारी रहेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता हुफ़ेज़ा अहमदी ने कुछ निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व किया।

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