Wednesday, September 9, 2026
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Murder of Trust: सावधान! वर्दी पहनकर किया विश्वासघात: हाईकोर्ट ने क्यों कहा- यह तो भरोसे का कत्ल हुआ है?…जानिए इश्क से धाेखा देने तक का केस

Murder of Trust: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) का फर्जी कॉर्पोरल बनकर एक महिला से धोखाधड़ी, जबरन वसूली और बलात्कार करने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

हाई कोर्ट जस्टिस आशीष नैथानी की बेंच उस व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसने एक सरकारी कर्मचारी होने का ढोंग रचा और एक परिवार के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी के इस कृत्य ने न केवल पीड़िता को शारीरिक और मानसिक रूप से झकझोर दिया है, बल्कि भरोसे की नींव को भी पूरी तरह खत्म कर दिया है।

जालसाजी की पूरी कहानी (The Mastermind’s Plot)

  • अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने खुद को SSB में कॉर्पोरल बताकर 2021 में पीड़िता के माता-पिता से संपर्क किया था।
  • फेसबुक पर फर्जी रुतबा: आरोपी ने खुद को एक प्रभावशाली व्यक्ति दिखाने के लिए फेसबुक और मोबाइल पर एक मर्फ्ड (Morphed) फोटो दिखाई, जिसमें वह कथित तौर पर DIG से पुरस्कार प्राप्त कर रहा था।
  • भरोसे की सगाई: आरोपी के ‘सरकारी कर्मचारी’ होने के दावे पर विश्वास करते हुए 7 सितंबर, 2022 को पीड़िता के साथ उसकी सगाई कर दी गई।
  • धोखाधड़ी और शोषण: सगाई के बाद आरोपी ने बहाने बनाकर पैसे ऐंठने शुरू किए। इसके बाद वह पीड़िता को नैनीताल घुमाने ले गया और वहाँ एक होटल में उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।

कोर्ट का कड़ा रुख: विश्वास का टूटना गंभीर अपराध

  • जस्टिस आशीष नैथानी ने जमानत याचिका खारिज कर गंभीर टिप्पणी भी की।
  • गहरा सदमा: आरोपी के इस कृत्य ने पीड़िता को शारीरिक और मानसिक रूप से अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। वह ‘टूटे हुए भरोसे’ (Broken Trust) के दौर से गुजर रही है।
  • शादी से इनकार: जब परिजनों ने शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी “छुट्टी न मिलने” का बहाना बनाकर टालमटोल करने लगा।
  • सुरक्षा की चिंता: कोर्ट ने माना कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है, तो वह पीड़िता को डरा-धमका सकता है और गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

बचाव पक्ष बनाम अभियोजन की दलीलें

  • बचाव पक्ष: वकील ने तर्क दिया कि दोनों सोशल ऐप के जरिए मिले, दोस्त बने और आपसी सहमति से सगाई हुई। यह केवल आपसी विवाद का मामला है और आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है।
  • अभियोजन पक्ष: सरकारी वकील विकास उनियाल ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने वर्दी का इस्तेमाल करके न केवल पहचान छिपाई, बल्कि यौन शोषण और जबरन वसूली भी की।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
अदालतउत्तराखंड हाई कोर्ट (जस्टिस आशीष नैथानी)।
मुख्य आरोपफर्जी SSB कॉर्पोरल बनना, रेप और जबरन वसूली।
धोखाधड़ी का हथियारमर्फ्ड फोटो (DIG से पुरस्कार लेते हुए)।
कोर्ट का आदेशजमानत याचिका खारिज; आरोपी को राहत नहीं।
अहम टिप्पणी“आरोपी गवाहों और पीड़िता के लिए खतरा बन सकता है।”

वर्दी की मर्यादा और सामाजिक सतर्कता

यह मामला उन जालसाजों के लिए एक कड़ा सबक है जो सोशल मीडिया और फोटो एडिटिंग का सहारा लेकर अपनी पहचान बदलते हैं और वैवाहिक प्रस्तावों के जरिए परिवारों को ठगते हैं। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ‘पहचान की चोरी’ और ‘भरोसे का कत्ल’ जैसे जघन्य अपराधों में आरोपी किसी भी तरह की कानूनी सहानुभूति का हकदार नहीं है।

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