Tech Success Story: यह कहानी हर उस छात्र के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है जो किसी एक परीक्षा के परिणाम को ही अपनी जिंदगी का आखिरी सच मान लेता है।
आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के डायरेक्टर वी. कामाकोटी (V. Kamakoti) का यह सफर साबित करता है कि कोई भी एक रिजल्ट आपका भविष्य तय नहीं कर सकता। आज भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक, IIT मद्रास की कमान संभालने वाले वी. कामाकोटी का अतीत एक औसत और असफल छात्र जैसा रहा था।
जानिए वी. कामाकोटी का सफर
शुरुआती असफलता: जब उन्होंने छात्र जीवन में ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE) दिया, तो वे इसे पास नहीं कर पाए थे।
केमिस्ट्री का स्कोर: आपको जानकर हैरानी होगी कि इस परीक्षा के केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) पेपर में उन्हें सिर्फ 1 नंबर मिला था।
एक नया रास्ता: इस असफलता से निराश होकर बैठने के बजाय, उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे रास्तों और अवसरों को चुना。 उन्होंने हार नहीं मानी और आगे चलकर इसी IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री (M.Tech) और पीएचडी (PhD) पूरी की।
जिस परीक्षा में हुए फेल, उसी के बने ‘चेयरमैन’!
कामाकोटी की जिंदगी का सबसे बड़ा और दिलचस्प यू-टर्न तब आया जब उन्होंने उसी सिस्टम में वापसी की जिसने उन्हें कभी खारिज किया था।
फैकल्टी के रूप में शुरुआत: साल 2001 में वे आईआईटी मद्रास में बतौर फैकल्टी सदस्य शामिल हुए। उन्होंने कंप्यूटर आर्किटेक्चर, साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेजोड़ रिसर्च की।
JEE के चेयरमैन बने: समय का चक्र ऐसा घूमा कि जिस जेईई परीक्षा को वे कभी क्रैक नहीं कर पाए थे, आगे चलकर वे आईआईटी मद्रास में JEE के चेयरमैन (Chairman) बने और खुद उस परीक्षा के पूरे आयोजन को संभाला!
डायरेक्टर का पद: जनवरी 2022 में उन्होंने आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर (Director) के रूप में कार्यभार संभाला।
शानदार उपलब्धियां और ‘पद्म श्री’ सम्मान
- प्रोफेसर वी. कामाकोटी का योगदान सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहा, उन्होंने देश के तकनीकी विकास में अहम भूमिका निभाई।
- राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान: उन्होंने भारत के ‘माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम’ का नेतृत्व किया और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड में भी अपनी सेवाएं दीं।
- पद्म श्री सम्मान: उनकी इन्हीं अभूतपूर्व राष्ट्रीय और शैक्षणिक सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2026 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ (Padma Shri) से नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें डीआरडीओ (DRDO) एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड और अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजी इनोवेशन नेशनल फैलोशिप जैसे कई बड़े पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
भविष्य की इंजीनियरिंग को लेकर उनका नजरिया
आईआईटी मद्रास के प्रमुख के रूप में, वे पारंपरिक किताबों से हटकर आधुनिक शिक्षा के समर्थक हैं।
रिस्पॉन्सिबल एआई (Responsible AI): उनका मानना है कि जैसे-जैसे एआई ताकतवर हो रहा है, इसके नैतिक पहलुओं और पक्षपात (Bias) को रोकना भी उतना ही जरूरी है।
फैकल्टी ऑफ प्रैक्टिस: वे क्लासरूम में थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ज्ञान देने के लिए इंडस्ट्री के अनुभवी प्रोफेशनल्स को लाने की वकालत करते हैं।
JEE और अन्य प्रतियोगियों के लिए सबसे बड़ा सबक
अक्सर एडमिशन और रिजल्ट के सीजन में सिर्फ रैंक-1 (AIR 1) लाने वालों की चर्चा होती है। लेकिन वी. कामाकोटी जैसी कहानियां हमें सिखाती हैं कि सफलता कभी भी एक सीधी रेखा में नहीं चलती। एक खराब स्कोर या किसी एंट्रेंस एग्जाम में फेल होना आपकी जिंदगी का अंत नहीं है। सबसे ज्यादा मायने यह रखता है कि आप लगातार सीखने, खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालने और आने वाले नए अवसरों को लपकने के लिए कितने तैयार हैं। प्रोफेसर वी. कामाकोटी (V. Kamakoti) के नेतृत्व में आईआईटी मद्रास ने भारत को तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स पर काम किया है।
सबसे प्रमुख और क्रांतिकारी प्रोजेक्ट्स
‘शक्ति’ (SHAKTI) – भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर
- प्रोफेसर वी. कामाकोटी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक ‘शक्ति’ माइक्रोप्रोसेसर प्रोजेक्ट का नेतृत्व करना है।
- क्या है शक्ति?: यह भारत का पहला स्वदेशी (Indigenously Developed) और ओपन-सोर्स माइक्रोप्रोसेसर है, जिसे पूरी तरह से आईआईटी मद्रास की टीम ने डिजाइन किया है।
- महत्व: अब तक भारत कंप्यूटर चिप्स और प्रोसेसर्स के लिए पूरी तरह से विदेशी कंपनियों (जैसे Intel या AMD) पर निर्भर था। प्रोफेसर कामाकोटी की देखरेख में बने इस प्रोसेसर के बाद भारत परमाणु, रक्षा, और अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपने खुद के सुरक्षित और स्वदेशी चिप्स का इस्तेमाल करने में सक्षम हो सका है।
- उपयोग: इस प्रोसेसर का इस्तेमाल स्मार्टवॉच, कैमरे, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइसेज से लेकर बड़े सरकारी और रक्षा उपकरणों में किया जा रहा है।
साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा (Cybersecurity Initiatives)
चूंकि प्रोफेसर कामाकोटी का मुख्य रिसर्च एरिया इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी (Information Security) रहा है, उन्होंने देश की डिजिटल सुरक्षा में बहुत बड़ा योगदान दिया है।
सुरक्षित नेटवर्क: उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के लिए कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोजेक्ट्स को लीड किया है।
सुरक्षा सलाहकार: वे भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड (National Security Advisory Board) के सदस्य भी रह चुके हैं, जहाँ उन्होंने देश को बड़े साइबर हमलों (Cyber Attacks) से बचाने की रणनीतियाँ और नीतियां तैयार करने में मदद की।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Task Force)
जब भारत सरकार ने देश में एआई (AI) के भविष्य और उसके सही इस्तेमाल को लेकर काम शुरू किया, तो इस जिम्मेदारी के लिए भी प्रोफेसर कामाकोटी को चुना गया।
एआई टास्क फोर्स के प्रमुख: वे केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स’ (AI Task Force) के चेयरमैन रहे।
योग्यवाद: उन्होंने इस बात का खाका तैयार किया कि कैसे एआई का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।
आईआईटी मद्रास में ‘BS इन डेटा साइंस’ कोर्स की शुरुआत
- बतौर डायरेक्टर, प्रोफेसर कामाकोटी ने शिक्षा को हर घर तक पहुँचाने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया।
- बिना JEE के एंट्री: उन्होंने आईआईटी मद्रास में ‘BS इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशन्स’ (BS in Data Science) नाम से एक ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम शुरू किया।
- फायदा: इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एडमिशन लेने के लिए छात्रों को JEE परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं होती। कोई भी छात्र जो 12वीं पास है, वह घर बैठे आईआईटी मद्रास जैसी शीर्ष संस्था से वर्ल्ड-क्लास डिग्री ले सकता है। इस कदम से उन्होंने लाखों उन छात्रों के सपनों को सच किया जो जेईई क्रैक नहीं कर पाते। जिस छात्र को कभी केमिस्ट्री में सिर्फ 1 नंबर मिला था, उसने आगे चलकर न सिर्फ भारत का पहला कंप्यूटर ब्रेन (चिप) बनाया, बल्कि देश की पूरी शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था को बदल कर रख दिया।
कंप्यूटर वैज्ञानिक प्रोफेसर वी. कामाकोटी (V. Kamakoti) का प्रोफाइल
जन्म और शुरुआती जीवन (Birth & Early Life)
- जन्म: प्रोफेसर वी. कामाकोटी का जन्म तमिलनाडु के एक पारंपरिक और शिक्षित परिवार में हुआ था।
- शुरुआती पढ़ाई: उन्होंने अपनी स्कूली और शुरुआती कॉलेज की पढ़ाई चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) से ही पूरी की। छात्र जीवन में वे एक औसत छात्र थे और शुरुआत में उन्हें जेईई (JEE) परीक्षा में असफलता का सामना भी करना पड़ा था।
पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background)
प्रोफेसर कामाकोटी के परिवार का झुकाव हमेशा से शिक्षा, संस्कृति और देश सेवा की ओर रहा है।
शैक्षणिक और सांस्कृतिक माहौल: उनके परिवार में शिक्षा को सर्वोच्च स्थान दिया जाता था। यही कारण था कि शुरुआती असफलताओं (जैसे जेईई क्रैक न कर पाना और केमिस्ट्री में महज 1 नंबर आना) के बावजूद उनके परिवार ने उन्हें हतोत्साहित नहीं किया, बल्कि आगे बढ़ने और सीखने के लिए प्रेरित किया।
साधारण पृष्ठभूमि से शीर्ष तक: एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर देश के सबसे बड़े तकनीकी संस्थान के शीर्ष पद तक का सफर तय किया।
व्यक्तिगत और पेशेवर प्रोफाइल (Professional Profile)
प्रोफेसर वी. कामाकोटी का प्रोफाइल एक बेहतरीन शोधकर्ता (Researcher), शिक्षक और कुशल प्रशासनिक लीडर का बेहतरीन मिश्रण है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
आईआईटी मद्रास से जुड़ाव: जेईई फेल होने के बाद उन्होंने अन्य माध्यमों से अपनी इंजीनियरिंग पूरी की और फिर आईआईटी मद्रास का रुख किया। उन्होंने इसी संस्थान से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री (M.Tech) और पीएचडी (PhD) की उपाधि हासिल की।
करियर और मुख्य पद (Career & Key Positions)
- बतौर शिक्षक शुरुआत: साल 2001 में वे आईआईटी मद्रास में बतौर फैकल्टी सदस्य (प्रोफेसर) शामिल हुए और दो दशकों से अधिक समय तक छात्रों को पढ़ाया।
- जेईई चेयरमैन: जिस परीक्षा को वे कभी पास नहीं कर पाए थे, आगे चलकर वे आईआईटी मद्रास में JEE के चेयरमैन बने।
- आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर: जनवरी 2022 में उन्होंने आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर (Director) के रूप में कार्यभार संभाला और वर्तमान में भी वे इस पद पर संस्थान का नेतृत्व कर रहे हैं।

